ख़बर बीकानेर | 31 जनवरी 2026
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राजस्थान के बीकानेर जिले के छतरगढ़ क्षेत्र में सरकारी ज़मीन की बंदरबांट और जालसाजी का बड़ा मामला सामने आया है। करीब 6112 बीघा की कीमती सरकारी ज़मीन को नियम विरुद्ध तरीके से आवंटित कर सरकार को लगभग 25 करोड़ रुपये का नुकसान पहुँचाया गया है।
इस मामले की जांच कर रही पुलिस टीम को बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने 3 पटवारियों, एक गिरदावर और 3 दलालों सहित कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों और भू-माफियाओं की मिलीभगत से यह पूरा घोटाला अंजाम दिया गया था।
ऐसे हुआ घोटाले का खुलासा
12 मार्च 2024 को छतरगढ़ की तत्कालीन तहसीलदार राजकुमारी ने राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी और फर्जी आवंटनों का मामला प्रकाश में आने पर पुलिस में आधिकारिक रिपोर्ट दर्ज करवाई थी।
इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जिम्मेदारी एएसपी श्रीगंगानगर रघुवीर शर्मा को सौंपी गई। महीनों तक रिकॉर्ड खंगालने और दस्तावेज़ों की प्रमाणिकता की जांच के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपी
पटवारी सुंदरलाल जालप, वीरेंद्र सिंह, जसवीर सिंह
गिरदावर अजेंद्र सिंह भाटी
दलाल रमेश पुरोहित, महेंद्र सिंगड, सतपाल
इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने फर्जी दस्तावेज़ तैयार कर जमीन गलत व्यक्तियों के नाम आवंटित की।
इन गांवों में फैला था फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया कि सिंडिकेट ने छतरगढ़ तहसील के 8 गांवों को निशाना बनाया था—
मोतिगढ़, नापसरिया, सरदारपुरा, राजा सर भाटियान, कुंडल, घेघड़ा, सत्तासर और लूणखा।
इन गांवों की उपजाऊ सरकारी जमीन को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विभिन्न लोगों के नाम कर दिया गया था।
सरकारी खजाने को 25 करोड़ का नुकसान
प्राथमिक जांच में अनुमान लगाया गया है कि इस जमीन घोटाले से सरकार को कम से कम 25 करोड़ रुपये का सीधा नुकसान हुआ है।
एएसपी रघुवीर शर्मा का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से कड़ी पूछताछ की जा रही है। पुलिस को संदेह है कि इस घोटाले में और भी प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता हो सकती है।
आगे क्या?
सरकार अब छतरगढ़ क्षेत्र के सभी संदिग्ध आवंटनों का नए सिरे से रिव्यू करवाने की तैयारी में है।
उम्मीद है कि जल्द ही अवैध रूप से आवंटित सरकारी जमीन को वापस कब्जे में लिया जाएगा।
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